
नई दिल्ली: दिल्ली में NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी ‘संसद चलो’ मार्च के बीच सोमवार को उस वक्त सबका ध्यान shabana azmi की ओर गया, जब उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होकर एक बड़ा दावा किया। अभिनेत्री ने कहा कि वह और जावेद अख्तर पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख चुके थे, लेकिन जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुद इस आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया।
शबाना आज़मी के मुताबिक, पत्र मिलने की पुष्टि तो हुई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। उनका कहना है कि इसके बाद उन्होंने खुद छात्रों के बीच पहुंचने का मन बनाया।
प्रदर्शन में पहुंचीं, फिर बताया क्यों उठाया यह कदम
दिल्ली में आयोजित इस मार्च के दौरान shabana azmi छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ पैदल मार्च करती नजर आईं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है और लोकतंत्र में संवाद किसी भी विवाद का सबसे बेहतर रास्ता होता है।
'जवाब नहीं मिला, इसलिए खुद आना पड़ा'—PM को लिखे पत्र पर क्या बोलीं शबाना आज़मी?
MEDIA से बातचीत में अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने और जावेद अख्तर ने प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखे थे। उनका कहना था कि पत्र में केवल इतना आग्रह किया गया था कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू करे।
उन्होंने दावा किया कि पत्र मिलने की औपचारिक सूचना मिली थी और जल्द जवाब देने की बात कही गई थी। लेकिन कई दिनों तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आने के बाद उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन जताने का फैसला किया। फिलहाल, इस दावे पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बॉलीवुड की गैरमौजूदगी पर भी दिया करारा जवाब
जब shabana azmi से पूछा गया कि बॉलीवुड की बड़ी हस्तियां इस आंदोलन में क्यों नहीं दिख रहीं, तो उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन की गंभीरता का आकलन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने फिल्मी सितारे वहां मौजूद हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब बात देश के छात्रों के भविष्य की हो, तो सारा ध्यान मुख्य मुद्दे पर होना चाहिए, न कि इस बात पर कि कौन प्रदर्शन में आया और कौन नहीं।
आखिर किस बात को लेकर हो रहा है विरोध?
यह आंदोलन NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कदम उठाए जाएं और छात्रों का भरोसा बहाल किया जाए।
रिपोर्टों के अनुसार, इस आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकार के साथ संवाद की मांग उठा रहे हैं।
कविता कौशिक और विद्या मालवड़े भी छात्रों के समर्थन में उतरीं
अभिनेत्री कविता कौशिक ने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस से अपील की कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और किसी तरह की हिंसा से बचा जाए।
वहीं, अभिनेत्री विद्या मालवड़े ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है और युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए। दोनों कलाकारों ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों के रुख का समर्थन किया है और शांतिपूर्ण संवाद की वकालत की है।
NEET विवाद इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया?
यह परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र अपनी रात-दिन की मेहनत के बाद इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर उठने वाले सवाल केवल एक टेस्ट नहीं, बल्कि पूरे चयन तंत्र और युवाओं के भरोसे से जुड़े होते हैं। इसी वजह से यह मुद्दा छात्रों, अभिभावकों और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों के बीच लगातार गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब आगे क्या?
फिलहाल आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी सरकार से बातचीत और अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।
