
Dhurandhar के बाद अब इतिहास रचने की तैयारी?
ब्लॉकबस्टर Dhurandhar के बाद निर्देशक Aditya Dhar एक और बड़े प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला किसी एक्शन थ्रिलर का नहीं, बल्कि भारत के महान ऐतिहासिक योद्धाओं में गिने जाने वाले लाचित बोरफुकन (Lachit Borphukan) की जिंदगी को बड़े पर्दे पर उतारने का है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद इस बात पर से पर्दा उठाया है कि उन्होंने इस भव्य बायोपिक को लेकर निर्देशक आदित्य धर (Aditya Dhar) के साथ शुरुआती दौर की चर्चा पूरी कर ली है। सरकार का साफ़ विज़न है कि यह मेगा-बजट फिल्म सिर्फ देश तक सीमित न रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम के इस महान और जांबाज सेनानायक की गौरवगाथा को बुलंद करे।
क्यों चुना गया Aditya Dhar?
मुख्यमंत्री का मानना है कि बड़े पैमाने पर ऐतिहासिक और देशभक्ति से जुड़ी कहानियों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता Aditya Dhar में है।
हाल ही में उनकी फिल्म Dhurandhar को जबरदस्त सफलता मिली, जिसके बाद उन्हें ऐसे निर्देशक के रूप में देखा जा रहा है जो बड़े कैनवास पर ऐतिहासिक घटनाओं को सिनेमाई अंदाज में पेश कर सकते हैं।
बताया गया है कि अगस्त में निर्देशक के असम दौरे की भी संभावना है, जहां फिल्म की कहानी, स्केल और निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा हो सकती है।
अगर Aditya Dhar नहीं बने निर्देशक तो क्या होगा?
मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि इस परियोजना का उद्देश्य किसी एक निर्देशक पर निर्भर नहीं है।
अगर किसी कारण से Aditya Dhar यह फिल्म नहीं बना पाते, तब भी असम सरकार इस बायोपिक को आगे बढ़ाएगी और किसी दूसरे योग्य निर्देशक से संपर्क करेगी।
यानी सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—Lachit Borphukan की कहानी बड़े स्तर पर दुनिया तक पहुंचनी चाहिए।
कौन थे Lachit Borphukan?
भारत के इतिहास में लाचित बोरफुकन को असम के सबसे महान सैन्य नायकों में गिना जाता है।
उन्होंने वर्ष 1671 में हुए सराईघाट के युद्ध (Battle of Saraighat) में मुगल सेना को निर्णायक रूप से रोककर असम की रक्षा की थी। उस समय वे गंभीर रूप से बीमार थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सेना का नेतृत्व किया और युद्ध का रुख बदल दिया।
उनकी वीरता, रणनीति और नेतृत्व आज भी असम में गर्व के साथ याद किए जाते हैं।
Battle of Saraighat क्यों माना जाता है ऐतिहासिक?
इतिहासकार इस युद्ध को भारत के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य संघर्षों में शामिल करते हैं।
इस जीत के बाद मुगल साम्राज्य पूर्वोत्तर भारत में अपना विस्तार नहीं कर सका। यही वजह है कि Lachit Borphukan को केवल असम ही नहीं, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास के महान रणनीतिकारों में भी गिना जाता है।
असम सरकार का बड़ा विजन
यह प्रस्ताव सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है।
असम सरकार अपने राज्य के ऐतिहासिक नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है।
इसी दिशा में 2026-27 के बजट में Lachit Borphukan और स्वतंत्रता सेनानी कुशल कोंवर पर फिल्मों को समर्थन देने की घोषणा भी की गई है।
Aditya Dhar के लिए क्यों हो सकता है यह करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट?
ऐतिहासिक बायोपिक बनाना किसी भी निर्देशक के लिए आसान नहीं होता।
इस तरह की फिल्मों में केवल शानदार एक्शन या बड़े सेट ही काफी नहीं होते, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों, संस्कृति, भाषा, वेशभूषा और स्थानीय पहचान को भी सही तरीके से दिखाना जरूरी होता है।
यदि यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो Aditya Dhar के सामने मनोरंजन और इतिहास के बीच संतुलन बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
क्या आधिकारिक घोषणा हो चुकी है?
फिलहाल इस फिल्म की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
अभी तक सिर्फ मुख्यमंत्री ने बातचीत की जानकारी साझा की है। Aditya Dhar या उनकी टीम की ओर से फिल्म को लेकर कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित (Proposed Project) के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
NewsKaadda Take
अगर यह फिल्म बनती है, तो यह सिर्फ एक बायोपिक नहीं होगी बल्कि भारत के कम चर्चित लेकिन बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक नायकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का बड़ा माध्यम बन सकती है।
दर्शकों के लिए भी यह मौका होगा कि वे Lachit Borphukan जैसे वीर सेनानायक की कहानी बड़े पर्दे पर देखें, जिनकी बहादुरी भारतीय इतिहास का अहम अध्याय मानी जाती है।
(Disclaimer): इस फिल्म को लेकर अभी सिर्फ शुरुआती बातचीत हुई है और मेकर्स या डायरेक्टर की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। न्यूज़का अड्डा इस खबर की पुष्टि केवल मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों के आधार पर करता है।
